बुधवार, 12 सितम्बर 2007

बेरीनाग: कुछ और छवियाँ


















गराऊं का झरना













पत्थर और पानी

6 टिप्पणियाँ:

vishesh ने कहा…

हम भी आ ही गए बुग्‍याल तक.

आप भी ब्‍लॉग जगत में दखल रखते हैं, ये आज ही पता चला. गत माह बुग्‍यालों की सैर का अवसर मिलने को था, पर छुट्टी नहीं मिल पाई, सो हसरत दिल में ही रह गई.
वैसे भी " हमारे बॉस " , जी हां वही, वही... वे छुट़टी नहीं देते. इसलिए अब गांवों और पर्वतों के बीच जाना बंद सा हो गया है.
फुर्सत कम होने से अंर्तजाल पर विचरण के लिए भी पर्याप्‍त समय नहीं मिल पाता. बुग्‍याल तक फिर आऊंगा.

ANUNAAD ने कहा…

Saare fotu jordar hain bade bhai. Bade aap ho hi, bhai banane me aitraz hai to kaho ! bhai na kahenge kuchh aur kah lenge apko. Pataa nahin apko nainital mein zahoor da ki dukan mein milne wala 12-14 saal purana shirish yaad hai ki nahi.....

[ आशुतोष ] ने कहा…

भरपूर याद है। और तुम्हारी कविताओं का तो मैं पुराना मुरीद हूं। रही बात भाई की, वो तो मैं तुम्हारा पहले से ही हूं, अब बनाने न बनाने की बात ही कहां। वह तो मैं यूं ही मुंबइया `भाइयों´ के बहाने मजाक कर रहा था।

Kusum ने कहा…

Hello Bhaiya,

Didi (Sushma) ne apake blog ke bare mein bataya. Hindi padane ki aadat chut gayi hai. achha laga. par mujhe jo sabase achha laga woh hai pictures. Apke blog ki sari photographs bahut achhi hai. Is baar India jaungi to bugyaal dekhana pakka.

Kusum

ANUNAAD ने कहा…

बड़े भाई आपका दिया हुआ औजार मेरे बहुत काम आ रहा है। इसके लिए धन्यवाद। ये सभी फोटो बहुत अच्छे हैं।

Aflatoon ने कहा…

इन रमणीक स्थलों तक पहुँचने का तरीका बतायें।